Hi. This is Dr. Nitin Chaube, a B.A.M.S. (Ayurvedic) Doctor from india. I belong to the oldest school of medicine in the world and am proud of it. This blog brings to you interesting things that Ayurveda can achieve even on modern parameters. These are personal experiences. You can also know about your Prakruti - through paypal.me/nitinchUbe paying 30GBP for 3 consultations on or your health condition and your body type. https://www.digitalscorpions.in/prakruti/ - Detailed assessment is paid
Showing posts with label mp. Show all posts
Showing posts with label mp. Show all posts
Saturday, March 17, 2018
Tuesday, May 02, 2017
KATI BASTI
कमरदर्द से हम सभी कभी न कभी परेशान जरूर होते हैं। उठने-बैठने के गलत
पॉश्चर से यह समस्या और भी बढ़ जाती है। ऎसे में आयुर्वेदिक उपचार से रोगी
को राहत पहुंचाई जा सकती है।
प्रमुख कारण
गलत आदतें कमरदर्द का प्रमुख कारण हैं जैसे-कम्प्यूटर के आगे या ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना, उठने-बैठने व चलने का गलत तरीका, हçaयां कमजोर होना, शारीरिक श्रम न करना या ज्यादा करना और अत्यधिक तनाव जैसे कारणों से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है व नसों की ताकत कम हो जाती है। जब यह प्रक्रिया लगातार चलती है तो कमर के निचले हिस्से में दर्द व पैर सुन्न हो जाते हैं। कई बार दर्द एड़ी तक चला जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है।
दवाओं से जब आराम नहीं मिलता तो डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। कमरदर्द के अधिकतर मामलों में स्लिप डिस्क इसकी वजह बन जाता है। ऎसे में कटि बस्ति थैरेपी फायदेमंद होती है। साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों, योग और नियमित व्यायाम के अभ्यास से रोगी को आराम मिलता है।
उपचार की विधि
पेट के बल लेटे रोगी की पीठ पर उड़द के आटे की बनी हुई पीठी से एक रिंग बना दी जाती है। विशेषज्ञ द्वारा इस रिंग में औषधि युक्तगर्म तेल सहने लायक स्थिति में धीर-धीरे डाला जाता है। एक सिटिंग 40-45 मिनट की होती है व जरूरत के अनुसार 5-7 या ज्यादा सिटिंग विशेषज्ञ की राय से दी जाती हंै।
इसके लाभ
जड़ी-बूटियों से बने हुए गर्म तेल एवं औषधियों के गुण कमर की मांसपेशियों के सूक्ष्म ऊत्तकों में समा जाते हैं, जिससे कमर की मांसपेशियों की जकड़न व सूजन दूर होती है। खून का दौरा बढ़ता है, मांसपेशियों, हçaयों एवं नसों को पोषण मिलने से इनमें मजबूती आती है और तनाव दूर होकर दर्द में राहत मिलती है।
प्रमुख कारण
गलत आदतें कमरदर्द का प्रमुख कारण हैं जैसे-कम्प्यूटर के आगे या ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना, उठने-बैठने व चलने का गलत तरीका, हçaयां कमजोर होना, शारीरिक श्रम न करना या ज्यादा करना और अत्यधिक तनाव जैसे कारणों से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है व नसों की ताकत कम हो जाती है। जब यह प्रक्रिया लगातार चलती है तो कमर के निचले हिस्से में दर्द व पैर सुन्न हो जाते हैं। कई बार दर्द एड़ी तक चला जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है।
दवाओं से जब आराम नहीं मिलता तो डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। कमरदर्द के अधिकतर मामलों में स्लिप डिस्क इसकी वजह बन जाता है। ऎसे में कटि बस्ति थैरेपी फायदेमंद होती है। साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों, योग और नियमित व्यायाम के अभ्यास से रोगी को आराम मिलता है।
उपचार की विधि
पेट के बल लेटे रोगी की पीठ पर उड़द के आटे की बनी हुई पीठी से एक रिंग बना दी जाती है। विशेषज्ञ द्वारा इस रिंग में औषधि युक्तगर्म तेल सहने लायक स्थिति में धीर-धीरे डाला जाता है। एक सिटिंग 40-45 मिनट की होती है व जरूरत के अनुसार 5-7 या ज्यादा सिटिंग विशेषज्ञ की राय से दी जाती हंै।
इसके लाभ
जड़ी-बूटियों से बने हुए गर्म तेल एवं औषधियों के गुण कमर की मांसपेशियों के सूक्ष्म ऊत्तकों में समा जाते हैं, जिससे कमर की मांसपेशियों की जकड़न व सूजन दूर होती है। खून का दौरा बढ़ता है, मांसपेशियों, हçaयों एवं नसों को पोषण मिलने से इनमें मजबूती आती है और तनाव दूर होकर दर्द में राहत मिलती है।
Subscribe to:
Posts (Atom)
