Hi. This is Dr. Nitin Chaube, a B.A.M.S. (Ayurvedic) Doctor from india. I belong to the oldest school of medicine in the world and am proud of it. This blog brings to you interesting things that Ayurveda can achieve even on modern parameters. These are personal experiences. You can also know about your Prakruti - through paypal.me/nitinchUbe paying 30GBP for 3 consultations on or your health condition and your body type. https://www.digitalscorpions.in/prakruti/ - Detailed assessment is paid
Sunday, May 14, 2017
Thursday, May 11, 2017
Thursday, May 04, 2017
Tuesday, May 02, 2017
JANU BASTI
जीवनशैली की गलत आदतें, ऑफिस में लगातार लंबे समय तक बैठकर काम करना,
जरूरत से ज्यादा वजन उठाना या बिल्कुल काम न करने से घुटनों में दर्द की
दिक्कत बढ़ती है।
आयुर्वेद में प्रयोग होने वाली जानुबस्ति थैरेपी फायदेमंद है जो जोड़ के अंदर तक असर कर दर्द में राहत देती है। इसमें महा नारायण, विषगर्भ, बला आदि औषधियुक्त तेलों का इस्तेमाल होता है।
जानते हैं जानुबस्ति की विधि व लाभ के बारे में-
लाभ: इससे घुटने का दर्द, सूजन व जकडऩ दूर होने से हल्कापन आता है। औषधियुक्त तेल के सेंक से घुटने की मांसपेशियों, हड्डी व नसों को पोषण मिलता है। जोड़ लचीला होने से रक्तसंचार बढ़ता है। ऐसे होता इलाज रोगी को पीठ के बल लिटा दिया जाता है। इसके बाद घुटने पर उड़द की दाल के आटे से बनी पीठी (गुथा हुआ आटा) से एक रिंग बना देते हैं।
चिकित्सक की देखरेख में इस रिंग के अंदर सहने योग्य औषधियुक्त गुनगुना तेल डालते हैं। रिंग के अंदर से तेल धीरे-धीरे बाहर निकलता रहता है और ऊपर से गुनगुने तेल को डालते रहते हैं। कितनी सिटिंग: एक सिटिंग के दौरान इस प्रक्रिया में लगभग 35-40 मिनट का समय लगता है। जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ 5-7 या इससे ज्यादा सिटिंग के लिए मरीज को बुला सकते हैं।
ध्यान रखें: थैरेपी के तुरंत बाद स्नान न करें। साथ ही इसके बाद कुछ देर एसी में न बैठें।
आयुर्वेद में प्रयोग होने वाली जानुबस्ति थैरेपी फायदेमंद है जो जोड़ के अंदर तक असर कर दर्द में राहत देती है। इसमें महा नारायण, विषगर्भ, बला आदि औषधियुक्त तेलों का इस्तेमाल होता है।
जानते हैं जानुबस्ति की विधि व लाभ के बारे में-
लाभ: इससे घुटने का दर्द, सूजन व जकडऩ दूर होने से हल्कापन आता है। औषधियुक्त तेल के सेंक से घुटने की मांसपेशियों, हड्डी व नसों को पोषण मिलता है। जोड़ लचीला होने से रक्तसंचार बढ़ता है। ऐसे होता इलाज रोगी को पीठ के बल लिटा दिया जाता है। इसके बाद घुटने पर उड़द की दाल के आटे से बनी पीठी (गुथा हुआ आटा) से एक रिंग बना देते हैं।
चिकित्सक की देखरेख में इस रिंग के अंदर सहने योग्य औषधियुक्त गुनगुना तेल डालते हैं। रिंग के अंदर से तेल धीरे-धीरे बाहर निकलता रहता है और ऊपर से गुनगुने तेल को डालते रहते हैं। कितनी सिटिंग: एक सिटिंग के दौरान इस प्रक्रिया में लगभग 35-40 मिनट का समय लगता है। जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ 5-7 या इससे ज्यादा सिटिंग के लिए मरीज को बुला सकते हैं।
ध्यान रखें: थैरेपी के तुरंत बाद स्नान न करें। साथ ही इसके बाद कुछ देर एसी में न बैठें।
KATI BASTI
कमरदर्द से हम सभी कभी न कभी परेशान जरूर होते हैं। उठने-बैठने के गलत
पॉश्चर से यह समस्या और भी बढ़ जाती है। ऎसे में आयुर्वेदिक उपचार से रोगी
को राहत पहुंचाई जा सकती है।
प्रमुख कारण
गलत आदतें कमरदर्द का प्रमुख कारण हैं जैसे-कम्प्यूटर के आगे या ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना, उठने-बैठने व चलने का गलत तरीका, हçaयां कमजोर होना, शारीरिक श्रम न करना या ज्यादा करना और अत्यधिक तनाव जैसे कारणों से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है व नसों की ताकत कम हो जाती है। जब यह प्रक्रिया लगातार चलती है तो कमर के निचले हिस्से में दर्द व पैर सुन्न हो जाते हैं। कई बार दर्द एड़ी तक चला जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है।
दवाओं से जब आराम नहीं मिलता तो डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। कमरदर्द के अधिकतर मामलों में स्लिप डिस्क इसकी वजह बन जाता है। ऎसे में कटि बस्ति थैरेपी फायदेमंद होती है। साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों, योग और नियमित व्यायाम के अभ्यास से रोगी को आराम मिलता है।
उपचार की विधि
पेट के बल लेटे रोगी की पीठ पर उड़द के आटे की बनी हुई पीठी से एक रिंग बना दी जाती है। विशेषज्ञ द्वारा इस रिंग में औषधि युक्तगर्म तेल सहने लायक स्थिति में धीर-धीरे डाला जाता है। एक सिटिंग 40-45 मिनट की होती है व जरूरत के अनुसार 5-7 या ज्यादा सिटिंग विशेषज्ञ की राय से दी जाती हंै।
इसके लाभ
जड़ी-बूटियों से बने हुए गर्म तेल एवं औषधियों के गुण कमर की मांसपेशियों के सूक्ष्म ऊत्तकों में समा जाते हैं, जिससे कमर की मांसपेशियों की जकड़न व सूजन दूर होती है। खून का दौरा बढ़ता है, मांसपेशियों, हçaयों एवं नसों को पोषण मिलने से इनमें मजबूती आती है और तनाव दूर होकर दर्द में राहत मिलती है।
प्रमुख कारण
गलत आदतें कमरदर्द का प्रमुख कारण हैं जैसे-कम्प्यूटर के आगे या ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना, उठने-बैठने व चलने का गलत तरीका, हçaयां कमजोर होना, शारीरिक श्रम न करना या ज्यादा करना और अत्यधिक तनाव जैसे कारणों से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है व नसों की ताकत कम हो जाती है। जब यह प्रक्रिया लगातार चलती है तो कमर के निचले हिस्से में दर्द व पैर सुन्न हो जाते हैं। कई बार दर्द एड़ी तक चला जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है।
दवाओं से जब आराम नहीं मिलता तो डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। कमरदर्द के अधिकतर मामलों में स्लिप डिस्क इसकी वजह बन जाता है। ऎसे में कटि बस्ति थैरेपी फायदेमंद होती है। साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों, योग और नियमित व्यायाम के अभ्यास से रोगी को आराम मिलता है।
उपचार की विधि
पेट के बल लेटे रोगी की पीठ पर उड़द के आटे की बनी हुई पीठी से एक रिंग बना दी जाती है। विशेषज्ञ द्वारा इस रिंग में औषधि युक्तगर्म तेल सहने लायक स्थिति में धीर-धीरे डाला जाता है। एक सिटिंग 40-45 मिनट की होती है व जरूरत के अनुसार 5-7 या ज्यादा सिटिंग विशेषज्ञ की राय से दी जाती हंै।
इसके लाभ
जड़ी-बूटियों से बने हुए गर्म तेल एवं औषधियों के गुण कमर की मांसपेशियों के सूक्ष्म ऊत्तकों में समा जाते हैं, जिससे कमर की मांसपेशियों की जकड़न व सूजन दूर होती है। खून का दौरा बढ़ता है, मांसपेशियों, हçaयों एवं नसों को पोषण मिलने से इनमें मजबूती आती है और तनाव दूर होकर दर्द में राहत मिलती है।
Wednesday, April 26, 2017
DR NITIN CHAUBE - TRACK RECORD SINCE 2005 (OTHER THAN ROUTINE........................... )
TRACK RECORD SINCE 2005
3 PATIENTS OF MOTOR NEURON – WELL MANAGED AND PAIN CONTROLLED – MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
223 PATIENTS OF LOW BACK PAIN AND SCIATIC NEURALGIA – 173 RELEIEVED + 35 IMPROVED AND CONSISTENT +15 NOT REPORTED - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
237 PATIENTS OF KNEE JOINT PAIN – 130 RELEIEVED + 20 MANAGED EFFECTIVELY - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA & RAKTAMOKSHAN AS A PROCEDURE
45 PATIENTS OF PSORIASIS – WELL MANAGED AND CURED - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
179 PATIENTS OF AAMDOSHA – WELL MANAGED AND CURED - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
10 – PATIENTS OF CANCER –
1 – UTERINE – DID NOT CONTINUE AFTER 1ST VISIT – STAGE IV - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA - DID NOT CONTINUE AFTER 1ST VISIT – STAGE IV - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
1 – ORAL CANCER - DID NOT CONTINUE AFTER 1ST VISIT – STAGE IV - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA - DID NOT CONTINUE AFTER 1ST VISIT – STAGE IV - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
1 – THYROID CANCER – WELL MANAGED AND COULD CARRY HIS LIFE FOR ABOUT 2 YEARS WITH ALMOST NO PAIN – STAGE III – MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
4 - LUNG CANCER – STAGE IIIB & IV - WELL MANAGED WITH INCREASED LIFE UPTO 8 MONTHS ON AN AVERAGE WHEN SUGGESTED LIFE WAS UPTO A MAXIMUM OF 1 – 2 MONTHS; ZERO PULMONARY OEDEMA, GREATLY REDUCED PAIN, IMPROVED APPETITE IN 3. ONE CONTINUING IN IMPROVED STATE - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
1 – BONE CANCER – STAGE III – IMPORVED LIFE EXPECTANCY AND AVERAGE LIFE - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
1 – OESOPHAGEAL CANCER – STAGE III – PAIN WELL MANAGED - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
1 – OVARIAN CANCER – STAGE IV – IMPROEVD PHYSICAL STRENGTH, APPETITE, REDUCED EFFECT OF GASTRITITS MANAGING THE GASTRITIS EFFECT - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
4 PATIENTS OF PYOMETRA – CURED – MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
5 PATIENTS OF LEUCODERMA – CURED - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
7 CASES OF PRIMARY AND 12 CASES OF SECONDARY INFERTILITY – 14 SUCCESSFULLY MANAGED + 3 UNDER MANAGEMENT + 3 DID NOT TURN UP AFTER DISCUSSIONS - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
1 CEREBRAL PALSY – AGITATION MANAGED - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA & AYURVEDIC PROCEDURE
5 GULLIEN BARY – OLD AGE – COMPLETELY RECOVERED - MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
500 MALARIA AND POST MALARIA – COMPLETELY CURED – ONLY AYURVEDA AS MODULE OF TREATMENT
217 CASES OF HAEMORRHOIDS – DIFFERENT GRADES II AND III AND 2 GRA IV – 150 CURED – MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA MEDICINES
52 CASE OF UTERINE FIBROIDS – 43 CURED – MODULE OF TREATMENT ONLY AYURVEDA
3 CASES OF SPINAL BURST FRACTURES - POST SURGEICAL DEBILITIES AND PARALYSIS - CURED WITH AYURVEDIC MEDICATION AND PROCEDURES ONLY
1 GENDER IDENTITY DISORDER – CARE SUPPORT – UNDER PSYCHIATRIST EVALUATION AND MAY GO FOR SRS
PRESENTATIONS AT CONFERENCES AT -
RAJKOT
BANGALORE
HYDERABAD
BEIJING
VARANASI
LECTURE AT CHANDIGARH
Sunday, April 23, 2017
.............................TRUTH...............................
कैंसर नाम सुनते ही शरीर में एक सिहरन सी दौड़ जाती है। किसी अनहोनी एहसास जीवन की मुश्किलों से अधिक डरावना लगता है। दर्द, क्षोभ, ग्लानि दुःख और कष्ट के अनेक पर्याय एक साथ चेहरे पर आ कर चले जाते हैं।
कष्ट सिर्फ उस बीमार के शरीर नहीं, परन्तु उसके परिवार और निकट सम्बन्धियों सभी को होता है। पिछले ६ साल में विशेष इस क्षेत्र में जो की वात से सम्बद्ध है काम करते हुए करीब से इस दर्द को अनुभव किया है।
मेरा अनुभव brain, oesophageal (गले), lung (फेफड़े), और ovarian (अंडाशय) के कैंसर से जुड़ा रहा है। इन सभी परिस्थितियों में मैने पाया की आयुर्वेद में प्रयुक्त कुछ औषधियां ऐसी हैं जो कि रोगी को उसके कष्ट को सहने में आसानी करती हैं।
यह मेरा दुर्भाग्य रहा है कि मैने इन रोगियों को उनकी अंत-अवस्था में देखा और चाह कर भी अधिक कुछ नहीं कर सका, पर यह मेरा सौभाग्य भी रहा की मैं उनके दर्द को बाँट सका। शायद और पहले वह रोगी मुझे मिलते तो मैं कुछ और अधिक बेहतर कर पाता। पर मेरे अनुभवों ने जीवन को वह पहलू दिखा दिया जहाँ न मोह है न प्रेम। एक अजीब सा शून्य है पर भय नहीं, उन्माद नहीं; सिर्फ शान्ति।
मृत्यु का एहसास और उसकी अनुभूति तो नहीं की जा सकती पर जो मर रहा हो उसके भाव उस अनुभूति के एहसास का बोध करा सकते हैं। जिस किसी ने इस एहसास की अनुभूति की है वह शायद मेरी तरह भय, मोह, की मृगतृष्णा से अपने को आसानी से अलग कर ले जाता है। आखिर नश्वरता इस ब्रम्हांड का एक मात्र अटल सत्य भी तो है।
कष्ट सिर्फ उस बीमार के शरीर नहीं, परन्तु उसके परिवार और निकट सम्बन्धियों सभी को होता है। पिछले ६ साल में विशेष इस क्षेत्र में जो की वात से सम्बद्ध है काम करते हुए करीब से इस दर्द को अनुभव किया है।
मेरा अनुभव brain, oesophageal (गले), lung (फेफड़े), और ovarian (अंडाशय) के कैंसर से जुड़ा रहा है। इन सभी परिस्थितियों में मैने पाया की आयुर्वेद में प्रयुक्त कुछ औषधियां ऐसी हैं जो कि रोगी को उसके कष्ट को सहने में आसानी करती हैं।
यह मेरा दुर्भाग्य रहा है कि मैने इन रोगियों को उनकी अंत-अवस्था में देखा और चाह कर भी अधिक कुछ नहीं कर सका, पर यह मेरा सौभाग्य भी रहा की मैं उनके दर्द को बाँट सका। शायद और पहले वह रोगी मुझे मिलते तो मैं कुछ और अधिक बेहतर कर पाता। पर मेरे अनुभवों ने जीवन को वह पहलू दिखा दिया जहाँ न मोह है न प्रेम। एक अजीब सा शून्य है पर भय नहीं, उन्माद नहीं; सिर्फ शान्ति।
मृत्यु का एहसास और उसकी अनुभूति तो नहीं की जा सकती पर जो मर रहा हो उसके भाव उस अनुभूति के एहसास का बोध करा सकते हैं। जिस किसी ने इस एहसास की अनुभूति की है वह शायद मेरी तरह भय, मोह, की मृगतृष्णा से अपने को आसानी से अलग कर ले जाता है। आखिर नश्वरता इस ब्रम्हांड का एक मात्र अटल सत्य भी तो है।
Saturday, March 04, 2017
SPECIAL CONSULTATION CAMP FOR VATA DISORDERS!
विभिन्न अवसरों पर इन्होंने इस क्षेत्र में विशेष कार्य किये हैं; और इस उपलब्धि का परिचय उनके NCL, जो की भारत सरकार का उद्द्य्म है वहां बिताये - (मार्च २०११ - जून २०१४) तक के कार्यकाल में विशेष रूप से दिखता है।
इसी लाभ को जनसामान्य तक पहुंचाने के उद्देश्य से -
दिनांक २६/०३/२०१७ रविवार को एक निःशुल्क परामर्श कैंप का आयोजन गनियारी, बीजपुर रोड स्थित, S5 PHARMACEUTICALS, वैढ़न, सिंगरौली, मध्य प्रदेश में किया जा रहा है।
विशेष -
रीढ़ की हड्डी, कंधे के दर्द, घुटनों के दर्द, कमर के दर्द का पंचकर्म की सूक्ष्म प्रक्रियाओं की मदद से सफल उपचार के लिए संपर्क करें -९६६९१००९४३ (9669100943), ९४०७८०५३३३ (9407805333) पर और अपना अपॉइंटमेंट सुनिश्चित कर सकते हैं।
Thursday, March 02, 2017
Tuesday, February 28, 2017
CONSULT FREE FOR LIFE TIME; REGISTER ONCE................
Life style conditions have a lot to play and with advancing age they trouble one and all.
This includes -
DIABETES
HEART CONDITIONS
ARTHRITIS
IMMUNOCOMPROMIZATION
STROKE AND PARALYSIS
AIDS
CANCER
RHEUMATOID ARTHRITIS
PCOS
HYPOTHYROIDISM and many more ..............................................................
This is an opportunity to consult for lifetime with a competent Ayurvedic physicians from India and a prakruti analyst who does not only treat you but also works on how your body is transitioning with age and your nature of job and work and living conditions to help you refine your lifestyle and achieve healthier milestones in life.
You can consult with him at your ease for life following this one time offer!
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ARTHRITIS
IMMUNOCOMPROMIZATION
STROKE AND PARALYSIS
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CANCER
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PCOS
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This is an opportunity to consult for lifetime with a competent Ayurvedic physicians from India and a prakruti analyst who does not only treat you but also works on how your body is transitioning with age and your nature of job and work and living conditions to help you refine your lifestyle and achieve healthier milestones in life.
You can consult with him at your ease for life following this one time offer!
Wednesday, February 08, 2017
WHY MISCARRIAGES HAPPEN IN SPRING DST - AYURVEDIC VIEW (HINDI)
इस खबर पर गौर करें तोह ऋतुओं के बदलते समय और उनसे सम्बंधित पंचमहाभौतिक परिवर्तनों पर आयुर्वेद ,में विशेष व्याख्यान है।
जहाँ तक वसंत ऋतू से सम्बंधित इस प्रारंभिक खोज का विषय है तो इसमें दो संभावित बातें हैं -
1) इस काल में कफ का नाश होता है तथा पित्त की वृद्धि होती है; इसी के साथ वात की भी वृद्धि होती है।
2) वात की वृद्धि के कारन embryo का स्थापित न हो पाना या स्थापित हो कर abortion या miscarriage है जाना संभावित है. यह नहीं अधिक पित्त के कारन IUGR की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
अगर कफ कारक जीवनशैली का पालन करें तो इस असफलता को सफलता में बदला जा सकता है।
जहाँ तक वसंत ऋतू से सम्बंधित इस प्रारंभिक खोज का विषय है तो इसमें दो संभावित बातें हैं -
1) इस काल में कफ का नाश होता है तथा पित्त की वृद्धि होती है; इसी के साथ वात की भी वृद्धि होती है।
2) वात की वृद्धि के कारन embryo का स्थापित न हो पाना या स्थापित हो कर abortion या miscarriage है जाना संभावित है. यह नहीं अधिक पित्त के कारन IUGR की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
अगर कफ कारक जीवनशैली का पालन करें तो इस असफलता को सफलता में बदला जा सकता है।
Friday, February 03, 2017
PAYMENT PAGE FOR TRIDOSH
PAY FOR TRIDOSH CONSULTING APPLICATION FOR DR NITIN CHAUBE.
(You will be directed to this page when you click on tab to consult the doctor)
Dr.
Nitin Chaube
He is a BAMS and has a CME certification from Harvard
Medical School in management of Hepatitis B & C.
He has a practicing experience since 2004 when he started
with online consulting working as a consultant & customer care officer with
Shree Baidyanath Ayurveda Bhavan. His role involved consulting patients in the
camps held by the company and also replying to patient mails as part of
e-medicine practice. He also introduced the use of Yahoo Instant Messenger with
respect to e-medicine practice thus enabling live interactions with patients. Thereafter
he had been since May 2006 till April 2016 practicing e-medicine and
tele-medicine using his own website - www.ayushyavarsha.com
During this course notable and significant cases have been those related to
-ILD (Interstitial Lung Disease); Parkinsonism; parkinsonism with Type II
Diabetes Mellitus; Motor Neuron Disease. He was also associated with Nehru
Shatabdi Hospital a unit of Northern Coalfields Limited, a Govt.of India unit
between 2011-2014
PUBLICATIONS AND CONTRIBUTIONS
He has been
an active contributor at conferences working in areas of Cancer and Immune
conditions bringing together the understanding of modern science and Ayurveda.
Below Mentioned are a few of his works -
THE ROLE OF RICE BRAN IN COMBINATION WITH GILOY SATVA IN
IMMUNE BUILD UP -
Paper presented to RAJ AYUCON 2013
In the Journal of Raj Ayucon 2013 conference February 23,
2013
Ayurvedic Concepts of Immunity in the light of Bronchial
Asthma andPsoriasis and its analogous
comparison in modern medical immune physiology
ICIBM 2013 October 23, 2013
Authors: Nitin Chaube
Management of oedema and swelling using a combination of
Haridra (Curcuma longa extracts as
curcumin), Pine Apple stem (Anana squamosal extracts as
bromelain) and Shallaki (Boswellia Serrata
extracts as boswellic acid)
Omics Group December 6, 2013
Authors: Nitin Chaube
SYNERGISTIC ROLE OF BROMELAIN, CURCUMIN AND BOSWELLIC ACID
IN
MANAGEMENT OF PLEURAL OEDEMA IN A CASE OF CARCINOMA OF THE
LUNGS STAGE
3B
Omics Publishing Group April 29, 2014
Authors: Nitin Chaube
(You will be directed to this page when you click on tab to consult the doctor)
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